वैदिक चिंतन

वैदिक चिंतन एक विधा है जिसमें वैदिक सिद्धांतों, वैदिक ज्ञान और शाश्वत सत्य पर गहन विचार किया जाता है।

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Category: वैदिक ज्ञान

  • आर्ष संकलन सदैव अद्यतन

    १. मनुष्य का आत्मा सत्या सत्य का जानने हारा है, तथापि अपने प्रयोजन की सिद्धि हठ, दुराग्रह और अविद्यादि दोषों से सत्य को छोड़ असत्य पर झुक जाता है –…


  • स्वच्छ भारत का महादेव मेहतर, दक्ष भारत का शिल्पी कारीगर

    सृष्टि के आदिकाल से ऋषि, महर्षि, मुनि, धर्माचार्य और विश्ववारा संस्कृति के महानायकों, लोकनायकों ने स्वच्छता और दक्षता को जीवन के प्रथम सोपान में रखा है। यही कारण था कि यज्ञ…


  • महाकुंभ एक विहंगम दृष्टि में

    वेद अपौरुषेय हैं और ईश्वर कृत हैं। सर्वप्रथम परमपिता परमात्मा की महती कृपा से अमैथुनी सृष्टि के परम ब्रह्मर्षि अग्नि, वायु, आदित्य, अङिगरा के हृदय में वेदों का प्रकाश किया।…


  • विश्ववारा वैदिक संस्कृति 

    वेद अपौरूषेय है। सर्वप्रथम सृष्टि में परमबह्म परमात्मा ने अमैथुनी सृष्टि का प्रादुर्भाव कर हमें चार ऋषियों अग्नि, वायु, आदित्य, अंगिरा के हृदय में अपौरूषेय ज्ञान क्रमशः ऋगवेद, यजुर्वेद, सामवेद…


  • पाखण्ड पर प्रहार, श्राद्ध पर तलवार 

    पाखण्ड। कथनी और करनी के भेद को पाखण्ड समझना चाहिए। जिस मनुष्य के वचन और कर्म में अन्तर दिखाई देता है, वहीं से पाखण्ड प्रारंभ हो जाता है अर्थात् जब मनसा वाचा…


  • समग्र श्रेष्ठता का द्योतक “पण्डित”

    सृष्टि काल से भारत शिक्षा, संस्कृति, संस्कार साधन का साधक रहा है और उक्त ज्ञान विज्ञान को संसार को देकर कृण्वन्तोविश्वार्यम् को चरितार्थ किया है। यह कार्य आदि ऋषि ब्रह्मा से लेकर…


  • उपनयन संस्कार

    हमारा राष्ट्र भारतवर्ष समस्त भूमण्डल में शिक्षा संस्कार में आदिकाल से समस्त संसार को शिक्षित दीक्षित कर अनवरत दिशा बोध देता रहा है। विश्व के समस्त कर्णधारों ने अपने-अपने विवेक…


  •  वेद का परमचक्षु ज्योतिष

    काल के दो रूप हैं। एक तो प्राणियों का अन्त करने वाला काल और दूसरा है कलनात्मक अर्थात् गणित किया जाने वाला काल यानि समय। सूर्य (कालेश्वर) इस काल का…


  • आदमी

    भूख लगना आदमी की प्रकृति है , छीन खाना आदमी की विकृति है। अपने अतिथि को प्रेम से जो खिलाए, बांट खाना ही आदमी की संस्कृति है।।


  • आयुष्मान भवः

    ओ३म् भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि, धियो यो नः प्रचोदयात्। हे सर्वरक्षक परमात्मा, प्राण स्वरूप, प्राणाधार, दुख:विनाशक, दुख:हर्त्ता, सुख स्वरूप, आनंद ऐश्वर्य के दाता, कीर्ति के प्रदाता, आप सवित…


  • वेद में नारी का स्थान

    Nowhere in the whole world, no where any religion, a nobler, a beautiful, a more perfect ideal of marriage than you can find in the early writings of Hindus (…


  • वेदों में सामवेद

    वेद, विद्या के अक्षय भण्डार और ज्ञान के अगाध समुद्र हैं। वेद सत्य और तथ्य पर आधारित हैं तथा मानवता के आदर्शों का पूर्णरूपेण वर्णन है। वेद ईश्वरीय ज्ञान है।…


  • नववर्ष का ध्रुवीकरण

    वेद को विश्व ने सर्वमान्य आधार पर सबसे प्राचीनतम ग्रंथ एवं ज्ञान विज्ञान का आदि स्रोत के रूप में स्वीकार किया है और वास्तव में यह ऋत् सत्य है, क्योंकि…


  • श्री राम गर्भ गृह का शिलान्यास व भूमि पूजन और वैदिक मूल्य

    भारत सनातन संस्कृति का संवाहक है और आज भी संपूर्ण विश्व को अपनी सनातन संस्कृति से प्रभावित कर रहा है और प्रकाशित भी। यही कारण है कि कोरोना जैसी भयंकर…


  • विद्या ही संसार की प्रथम औषध

    सृष्टि के आदिकाल से ही परमसत्ता ने चार ऋषियों के हृदय में वेद ज्ञान का प्रकाश किया । ये चारों ऋषि (अग्नि ,वायु , आदित्य , अंगिरा) अन्य ऋषियों में…